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सोमवार, 15 अप्रैल 2013

झरीं नीम की पत्तियाँ (दोहा-गीतों पर एक काव्य) (ज)स्वर्ण-कीट) (४)तिज़ोरी-दिल |



(सारे चित्र 'गूगल-खोज' से साभार)

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भटक रहा बेघर हुआ, अरे ‘सलोना प्यार’ |
हृदय ‘तिज़ोरी’ हो गये, औ चाहत ‘व्यापार’ ||


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‘प्रीति’ को घेरे हैं ‘निठुर, लोभी अन्तर्द्वन्द’ |
जैसे ‘मैना’ स्वर्ण के,  पिंजरे’  में हो बन्द ||
‘व्यवसायों के जाल’ में फँसे ‘नेह-सम्बन्ध’ |
‘रिश्तों की गर्दन’ फँसी, पड़े ‘स्वार्थ के फंद’ ||
‘चमक-दमक’ से छिप गये, ‘नैसर्गिक व्यवहार’ |
हृदय ‘तिज़ोरी’ हो गये, औ चाहत ‘व्यापार’ ||१||



‘वित्त्वाद के पत्थरों’, की यों पड़ी है चोट |
‘कोमल कोंपल प्रेम की’, पाने लगी कचोट ||
क्यों ‘पैसों की पोटली’, मन पर ली है लाद |
‘बोझ’ तले दबने लगी, है ‘प्रियतम की याद’ ||
यन्त्रों के  इस  शोर से, दबी  ‘भ्रमर-गुंजार’ |
हृदय ‘तिज़ोरी’ हो गये, औ चाहत ‘व्यापार’ ||२||


‘चिन्तन’   को   जकड़े   हुये, ‘सोने की जंजीर’ |
तथा  ‘पराये दर्द’  में,  बहे   न   दृग  में नीर ||
‘जज्वे’  ठण्डे   हो   गये,  ‘अपनेपन’  के  आज |
‘बर्फ़ की सिल्ली’ बन गये, ‘प्रीति के मधुर मिजाज़’ ||
चलो  ‘दिलों’ में  हम  करें,  ‘गरम जोश बौछार‘ |
हृदय  ‘तिज़ोरी’  हो  गये,  औ चाहत ‘व्यापार’ ||३||



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3 टिप्‍पणियां:

  1. .भावात्मक अभिव्यक्ति आभार नवसंवत्सर की बहुत बहुत शुभकामनायें रिश्तों पर कलंक :पुरुष का पलड़ा यहाँ भी भारी .महिला ब्लोगर्स के लिए एक नयी सौगात आज ही जुड़ें WOMAN ABOUT MANजाने संविधान में कैसे है संपत्ति का अधिकार-1

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर प्रस्तुति | शुभकामनायें .नवसंवत्सर की बहुत बहुत शुभकामनायें हम हिंदी चिट्ठाकार हैं
    BHARTIY NARI
    PLEASE VISIT .

    उत्तर देंहटाएं

About This Blog

साहित्य समाज का दर्पण है |ईमानदारी से देखें तो पता चलेगा कि, सब कुछ मीठा ही तो नहीं , कडवी झाडियाँ उगती चली जा रही हैं,वह भी नीम सी लाभकारी नहीं , अपितु जहरीली | कुछ मीठे स्वाद की विषैली ओषधियाँ भी उग चली हैं | इन पर ईमानदारी से दृष्टि-पात करें |तुष्टीकरण के फेर में आलोचना को कहीं हम दफ़न तो नहीं कर दे रहे हैं !!

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