कल गौरैया-दिवस पर , कम्पूटर- तन्त्र सही न होने के कारण आज प्रकाशित -
(चित्र 'गूगल-खोज' से साभार )
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कितनी चंचल और चुलबुली गौरैया !
हम को
कितनी लगी है भली गौरैया !!

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जाने कहाँ कहाँ से उड़ कर आती है !
आँगन में जो कुछ मिलता खा जाती है ||
पड़ी किसी नज़र, बड़ी चौकन्नी हो-
चोंच में
दाना दबा ले चली गौरैया ||
कितनी चंचल और चुलबुली गौरैया !
हम को
कितनी लगी है भली गौरैया !!१!!

‘
'अपने
पेट’ के लिये ‘छीन’ या ‘झपट’ नहीं ||
अपनी
मेहनत से भरती है पेट सदा-
नहीं है करती
कभी धाँधली गौरैया ||
कितनी चंचल और चुलबुली गौरैया !
हम को
कितनी लगी है भली गौरैया !!२!!


‘चीं-चीं’-‘चीं-चीं’ चहक चहक कर गाती है
मीठे मीठे सुन्दर गीत सुनाती है ||
‘बक बक’ करती नहीं किसी ‘बड़बोले’ सी-
बातें
करती नहीं खोखली गौरैया |
कितनी
चंचल और चुलबुली गौरैया !
हम को
कितनी लगी है भली गौरैया !!३!!

बड़ी सलोनी
प्यारी होती है सब की ||
फुदक फुदक कर प्यारा नाच दिखाती है-
‘प्रकृति’
की सोनी गोद में पली गौरैया |
कितनी
चंचल और चुलबुली गौरैया !
हम को
कितनी लगी है भली गौरैया !!४!!

पर्यावरण की भी गौरैया रक्षक है |
और हानिकर कीटों की यह भक्षक है ||
“प्रसून” को यह प्यारी अपनी कविता सी-
लगता इनकी
मीत हो चली गौरैया ||
कितनी
चंचल और चुलबुली गौरैया !
हम को
कितनी लगी है भली गौरैया !!५!!

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