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शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

करवा चौथ (खुशियों के उपहार')






सब को शुभ हो, 'करबा चौथ' का यह पावन त्यौहार !

सभी की 'झोली' में भर जायें, 'खुशियों के उपहार' !!
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किसी बहन का 'असमय-अकाल' कहीं 'सुहाग' न  उजड़े |

'किसी बाग' में 'तरु खुशियों का' मत 'आँधी' से उखड़े || 

सब के 'सुहाग-बाग' में पनपे, 'फूली फली बहार' || 

सब को शुभ हो, 'करबा चौथ' का यह पावन त्यौहार !!१!!



'करवा-घट' में भरे 'प्रेम-रस',जिसका मधुर हो स्वाद  |

'भाग्य' 'सरसता' भरे, मिले मत, 'कारण हीन विषाद' ||

पति-पत्नी बाँटें इक दूजे को नित 'मीठा प्यार' !!

सब को शुभ हो, 'करबा चौथ' का यह पावन त्यौहार !!२!!


दोनों 'एक निष्ठ आस्था' से, बनें  परस्पर मीत |

मिल कर 'प्रीति की वीणा'  में, भर दें सुन्दर 'संगीत' ||
   
बनी रहे 'झंकार' 'नाद'-मय', कभी  न  टूटें  तार ||

सब को शुभ हो, 'करबा चौथ' का यह पावन त्यौहार !!३!!


'गण'-पति 'बुद्धि' प्रदान करें, औ 'अशिव', करें  'शिव' दूर |

'ऋद्धि-सिद्धि-समृद्धि'  के  फल  से, हो जीवन भर पूर ||

'चाँद'  के दर्शन से भर  जाये, 'चाहत'  में  'उजियार' !!

सब को शुभ हो, 'करबा चौथ' का यह पावन त्यौहार !!४!!


'सींकें  श्रेष्ठ  विचारों  की' मिल  कर  के  बना लें कूँची |

जिससे  रहे  साफ़  सुथरी  सी, 'मन  की  धरा  समूची ||

यह  कूँची  'मन  के  आँगन'  की, 'करकट' सके  बुहार  !!

सब को शुभ हो, 'करबा चौथ' का यह पावन त्यौहार !!५!!


'पौराणिकता'  से  बढ़  कर  है, 'यथार्थ  का परिवेश'  |

'परिवर्तन  में  रहे  सन्तुलन', मिले  हमें  'सन्देश' ||

'नयी-पुरानी सोच' एक जुट, 'युग' का करे सुधार !!

सब को शुभ हो, 'करबा चौथ' का यह पावन त्यौहार !!६!!


'दाम्पत्य-जीवन'  के  मधुवन' में,"प्रसून"  खिल  जायें |

सब  की  'भूली विसरी खुशियाँ', राम  करे  मिल  जायें !! 
   
'दुर्दिन  के  पतझर'  की  'बाग'  पे, पड़े  न  कोई  'मार'  !!

सब को शुभ हो, 'करबा चौथ' का यह पावन त्यौहार !!७!!



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4 टिप्‍पणियां:

  1. करवाचौथ की हार्दिक मंगलकामनाओं के साथ आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (03-11-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बढ़िया प्रस्तुति!!
    करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएँ !

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुंदर प्रस्तुति !
    आपको भी हार्दिक शुभकामनाएँ !
    ~सादर !

    उत्तर देंहटाएं

About This Blog

साहित्य समाज का दर्पण है |ईमानदारी से देखें तो पता चलेगा कि, सब कुछ मीठा ही तो नहीं , कडवी झाडियाँ उगती चली जा रही हैं,वह भी नीम सी लाभकारी नहीं , अपितु जहरीली | कुछ मीठे स्वाद की विषैली ओषधियाँ भी उग चली हैं | इन पर ईमानदारी से दृष्टि-पात करें |तुष्टीकरण के फेर में आलोचना को कहीं हम दफ़न तो नहीं कर दे रहे हैं !!

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