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मंगलवार, 13 नवंबर 2012

दीपावली की रचानायें (५)दीवाली-गीत



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चलो जलायें दीप, आज ‘दीवाली के’ !
मिल कर गायें गीत, ‘सुखद खुशहाली’ के ||
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मत ‘नफ़रत की आग’ जलाये, कोई भी |
‘वैर के कर्कश राग’ न गाये, कोई भी ||
देखो, ‘सुन्दर अमन की उजली चादर’ में –
‘मैले’ अब मत ‘दाग’ लगाये, कोई भी ||
‘कजरी, गोधन, भजन, कीर्तन’ गूँजें बस-
‘छन्द’ सम्मिलित हो जायें, ‘कब्बाली’ के |
मत उभरें ‘स्वर’ कहीं ‘बदनुमा गाली के’ || 
चलो जलायें दीप, आज ‘दीवाली के’ !!१!!

‘मुहँ मोड़े रूठों’ को आज मना लेंगे |
‘दुश्मन’ को भी ‘अपना मीत’ बना लेंगे ||
‘शिकवे, गिले’ मिटा कर पास में बैठेंगे-
सुन कर ‘सब की’, ‘अपनी बात’ सुना लेंगे ||
मिटे ‘विमुखता’, ‘उन्मुखता की ताल’ बजे-
बन जायें हम आज, ‘जुड़े कर ताली के’ |
‘मौन अँधेरा’ काटें, ‘स्वर उजियाली के’ ||  
चलो जलायें दीप, आज ‘दीवाली के’ !!२!!

चलो, ’बाग’ से, ‘कलह के काँटे’, काटें हम !
करें ‘जतन’, ‘सब खरपतबारें’ छाँटें हम !!
‘दिल’,’वीराने’ हुये कहीं हुये कहीं, उनको ढूँढ़ें-
‘गन्ध भरी सुन्दर सौगातें’ बाँटें हम ||
‘हास’ बिखेरें, ‘सु-मन’, “प्रसून” सभी मिल कर- 
हम ‘पादप खुशनुमा’, ‘एक ही माली’ के |
हम हैं ‘सुन्दर पुइष्प’, ‘एक ही डाली के’ ||
चलो जलायें दीप, आज ‘दीवाली के’ !!३!!



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3 टिप्‍पणियां:

  1. दीपावली की ढेर सारी शुभकामनायें |
    आपके इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (14-12-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी । जरुर पधारें ।
    सूचनार्थ ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आतिशबाजी का नहीं, ये पावन त्यौहार।।
    लक्ष्मी और गणेश के, साथ शारदा होय।
    उनका दुनिया में कभी, बाल न बाँका होय।
    --
    ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬●ஜ
    (¯*•๑۩۞۩:♥♥ :|| दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें || ♥♥ :۩۞۩๑•*¯)
    ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬●ஜ

    उत्तर देंहटाएं
  3. दीपावली की शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं

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साहित्य समाज का दर्पण है |ईमानदारी से देखें तो पता चलेगा कि, सब कुछ मीठा ही तो नहीं , कडवी झाडियाँ उगती चली जा रही हैं,वह भी नीम सी लाभकारी नहीं , अपितु जहरीली | कुछ मीठे स्वाद की विषैली ओषधियाँ भी उग चली हैं | इन पर ईमानदारी से दृष्टि-पात करें |तुष्टीकरण के फेर में आलोचना को कहीं हम दफ़न तो नहीं कर दे रहे हैं !!

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