(सारे चित्र' 'गूगल-खोज' से साभार)

अति आधुनिक समाज है, इतना हुआ सुधार !
देखो यौवन बेचता, है आधा संसार !!
शराब-खाने, जुवा-घर, में मर्यादा नग्न !
सुरा पिलाती, रूप-रस, से कर सब को मग्न !!
काल-गर्ल का नाम धर, होती वेश्या-वृत्ति !
धन की भूखी सुन्दरी, जहाँ कमाती वित्त !!
और इस तरह हो रहा, है तन का व्यापार !
देखो यौवन बेचता, है आधा संसार !!1!!
अड्डे दादा-भाइयों, के हैं कई बहाल !
जहाँ रूप-बाज़ार के, होते कई दलाल !!
लाते कई किशोरियाँ, को भटका कर नीच !
करते कलुषित लाज को, पाप-नीर से सींच !!
बना वेश्या सबल पशु, करके बलात्कार !
देखो यौवन बेचता, है आधा संसार !!2!!
बेबस कई किशोरियाँ, पाने को व्यवसाय !
फँसतीं इन के जाल में, हो जाये कुछ आय ||
बना इन्हें स्मैकिया, हैरोइन का दास !
पापी इन को फाँस कर, रखते अपने पास !!
दिखा-दिखा भय मृत्यु का, करते अत्याचार !!
देखो यौवन बेचता, है आधा संसार !!3!!
बहुत दुखदायी स्थिति का वर्णन सहज रूप में
जवाब देंहटाएंसटीक !
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर प्रस्तुति।
जवाब देंहटाएं--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (09-11-2014) को "स्थापना दिवस उत्तराखण्ड का इतिहास" (चर्चा मंच-1792) पर भी होगी।
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चर्चा मंच के सभी पाठकों को
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति.... आभार।
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