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शुक्रवार, 30 अगस्त 2013

कृष्ण-कन्हैया(२)था लिया जन्म भारत में घनश्याम ने |

कभी  कभी मन समाज के विद्रूप को देख कर ईश्वरोन्मुख हो उठता  है | यह एक अभिधा प्रधान गीत है | आज पुन: क्रिशन या अन्य पापोद्धारक अवतार की संसार को ज़रूरत है |
वजाय सोलह कलाओं के चौसठ कलाओं के स्वामी की | 
इस भजन में थोड़ा सा आधुनिक पुट है दूध में जल की तरह |
(सारे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)


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नन्द के थे वे प्यारे दुलारे ‘ललन’ |
थे यशोदा की ‘आँखों के तारे’ ललन ||
सारे वृज के ‘कन्हैया’ हुये अवतरित-
जब था पीड़ा से भारत लगा काँपने |
था लिया जन्म भारत में घनश्याम ने ||१||

रंग कोई भी उन पे है चढता नहीं |
असर उन पर किसी का भी पड़ता नहीं ||
लिप्त होता नहीं ‘रंग काला’ कभी-
इस लिये उन को काला किया ‘राम’ ने |
था लिया जन्म भारत में घनश्याम ने  ||२||

कंस के आचरण से हिली थी ‘धरा’ |
औ ‘मनुजता’ गयी, टूट कर चरमरा ||
‘न्याय का चक्र’ कान्हां ने हाथों लिया-
हाँ ‘रसातल’ में गिरती ‘धरा’ थामने |
था लिया जन्म भारत में घनश्याम ने  ||३||


त्याग दे ‘छल’ से मैला ‘कपट’ तू ज़रा |
‘मन की गीता के पन्ने’ पलट तू ज़रा ||
अपने ‘अपकर्म’ गिन ! अपने सत्कर्म’ गिन !!
‘पुण्य-पापों’ को कर आमने सामने |
यह सिखाया हमें कृष्ण घन श्याम ने ||४||

 बहुत सुन्दर “प्रसून”, ‘वृज के उद्द्यान’ के |
कृष्ण कारण थे ‘द्वापर के उत्थान’ के ||
‘सीप’ में बन्द कुछ ‘मोतियों’ की तरह-
उन की यादें संजोयीं, थीं ‘वृज-धाम’ ने |
था लिया जन्म भारत में घनश्याम ने  ||५||
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2 टिप्‍पणियां:

  1. शुभकामनायें आदरणीय-
    बढ़िया प्रस्तुति-
    सादर नमन-

    उत्तर देंहटाएं
  2. रंग कोई भी उन पे है चढता नहीं |
    असर उन पर किसी का भी पड़ता नहीं ||
    लिप्त होता नहीं ‘रंग काला’ कभी-
    इस लिये उन को काला किया ‘राम’ ने |
    था लिया जन्म भारत में घनश्याम ने ||२||
    bahut sundar bat kahi hai devdutt ji .

    उत्तर देंहटाएं

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साहित्य समाज का दर्पण है |ईमानदारी से देखें तो पता चलेगा कि, सब कुछ मीठा ही तो नहीं , कडवी झाडियाँ उगती चली जा रही हैं,वह भी नीम सी लाभकारी नहीं , अपितु जहरीली | कुछ मीठे स्वाद की विषैली ओषधियाँ भी उग चली हैं | इन पर ईमानदारी से दृष्टि-पात करें |तुष्टीकरण के फेर में आलोचना को कहीं हम दफ़न तो नहीं कर दे रहे हैं !!

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