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शुक्रवार, 24 अगस्त 2012

शंख-नाद(एक ओज गुणीय काव्य)-(द) -जागरण गीत- (३) !!बोलरेभय्या हल्ला आज!!






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सोया जाग मोहल्ला आज |

बोल रे भय्या हल्ला आज !!

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ललनाओं की अस्मत पर |
मेहनतकश की किस्मत पर ||
घात लगाये बैठा है |
अहंकार मैं ऐंठा है ||
उलझा हुआ फरेबों में-
‘उस’ ‘दबंग’का लल्ला आज |
बोल रे भय्या हल्ला आज !!१!!


हफ्ता,चन्दा,पगड़ी ले |
ठगता रकमें तगड़ी ले ||
‘नेताजी’ का ‘बेटा’ है |
वह मसनद पर लेटा है |
घुस कर कहीं गरीबों में –
खाता पड़ा निठल्ला आज |
बोल रे भय्या हल्ला आज !!२!!

!! इसका जीवन ऐश भरा |
हर पॉकेट में कैश भरा ||
दोनों हाथ समेटा है |
अपना हर दुःख मेटा है ||
अजगर के तन सा भारी -
उस तस्कर का गल्ला आज !!
बोल रे भय्या हल्ला आज !!३!!


राजनीति के कुछ ‘पण्डे’ |
खाते पीते मुस्तण्डे ||
कितना लाग लपेटा है !
‘दूध’ नहीं ‘सपरेटा’ है ||
दे कर के कोरा भाषण –
चले झाड़ कर पल्ला आज ||
बोल रे भय्या हल्ला आज !!४!!

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (25-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं

About This Blog

साहित्य समाज का दर्पण है |ईमानदारी से देखें तो पता चलेगा कि, सब कुछ मीठा ही तो नहीं , कडवी झाडियाँ उगती चली जा रही हैं,वह भी नीम सी लाभकारी नहीं , अपितु जहरीली | कुछ मीठे स्वाद की विषैली ओषधियाँ भी उग चली हैं | इन पर ईमानदारी से दृष्टि-पात करें |तुष्टीकरण के फेर में आलोचना को कहीं हम दफ़न तो नहीं कर दे रहे हैं !!

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